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Startup Funding: सरकार का 10,000 करोड़ का बड़ा दांव, नए नियमों से स्टार्टअप्स को मिलेगा बूस्ट

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केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की स्टार्टअप फंडिंग योजना के दूसरे चरण के नियम जारी किए। डीप-टेक, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन सेक्टर को मिलेगा बड़ा लाभ।

देश में स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए 10,000 करोड़ रुपये की फंडिंग योजना के दूसरे चरण को मंजूरी देते हुए इसके विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। यह योजना ‘फंड ऑफ फंड्स’ के तहत संचालित होगी, जिसका उद्देश्य देश में नवाचार और निवेश को मजबूती देना है।

इस नई पहल के जरिए सरकार सीधे स्टार्टअप्स में पैसा निवेश नहीं करेगी, बल्कि एक संरचित व्यवस्था के तहत वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के माध्यम से पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।

निवेश का नया मॉडल, पारदर्शिता पर जोर

सरकार ने इस योजना के तहत निवेश की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। यह फंड केवल उन वैकल्पिक निवेश कोषों के जरिए काम करेगा, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) में पंजीकृत हैं।

साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया है कि फंड का लाभ केवल उन्हीं स्टार्टअप्स को मिले, जिन्हें Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) से मान्यता प्राप्त है। इससे फर्जी या अपात्र संस्थाओं को फंडिंग मिलने की संभावना कम हो जाएगी।

सिडबी की अहम भूमिका

इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी Small Industries Development Bank of India (SIDBI) को दी गई है। यह एजेंसी फंड के चयन, निवेश और निगरानी की पूरी प्रक्रिया को संभालेगी।

SIDBI पहले चरण में भी इस योजना का संचालन कर चुकी है, जिससे उसे इस क्षेत्र का अनुभव है। अब दूसरे चरण में इसे और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाया गया है।

सरकार ने संकेत दिया है कि SIDBI के साथ एक और एजेंसी को भी जोड़ा जाएगा, जिससे तकनीकी विशेषज्ञता और कार्यान्वयन क्षमता को और मजबूत किया जा सके।

किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

इस बार फंड को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि अलग-अलग प्रकार के स्टार्टअप्स को उनकी जरूरत के अनुसार सहयोग मिल सके। इनमें डीप-टेक, माइक्रो वेंचर कैपिटल, तकनीक-आधारित विनिर्माण और सेक्टर-एग्नोस्टिक फंड शामिल हैं।

डीप-टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और एडवांस टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जाएगा। वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई तकनीक और उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले स्टार्टअप्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

कड़ी जांच के बाद ही मिलेगा निवेश

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फंड का आवंटन किसी भी स्थिति में बिना जांच के नहीं होगा। इसके लिए एक मजबूत स्क्रीनिंग और ड्यू डिलिजेंस प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सबसे पहले कार्यान्वयन एजेंसी प्रस्तावों की प्रारंभिक जांच करेगी। इसके बाद एक विशेष वेंचर कैपिटल इन्वेस्टमेंट कमेटी इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। यह समिति स्टार्टअप्स की टीम, उनकी रणनीति और संभावनाओं का गहन विश्लेषण करेगी।

इस समिति में कई अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सही और योग्य स्टार्टअप्स का चयन करना है।

निजी निवेश को मिलेगा बढ़ावा

सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए न केवल सरकारी निवेश बढ़ेगा, बल्कि निजी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। जब सरकार किसी क्षेत्र में निवेश करती है, तो इससे निजी क्षेत्र को भी उस दिशा में निवेश के लिए प्रेरणा मिलती है।

इस योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों और राज्यों के स्टार्टअप्स को भी समान अवसर देने की कोशिश की गई है, जिससे क्षेत्रीय असमानता को कम किया जा सके।

स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा

भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। लेकिन फंडिंग की कमी कई बार उनके विकास में बाधा बनती रही है। इस नई योजना से इस समस्या को काफी हद तक दूर करने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो भारत वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप हब के रूप में और मजबूत हो सकता है।

रोजगार और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

इस फंडिंग योजना का असर सिर्फ स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। नए स्टार्टअप्स के आने से तकनीकी विकास और इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का उद्देश्य है कि भारत को सिर्फ उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि नवाचार और उत्पादन का केंद्र बनाया जाए।

निष्कर्ष

10,000 करोड़ रुपये की यह फंडिंग योजना भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। इससे न केवल नए उद्यमियों को अवसर मिलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह योजना जमीन पर किस तरह लागू होती है और क्या यह वास्तव में स्टार्टअप्स के लिए गेम चेंजर साबित होती है।

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